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प्यार से पूछा है (गज़ल)

भास्करानंद झा भास्कर

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्यार से पूछा है सच में नफ़रत से जवाब मत देना
        
                                                    
                            
दिल का अमीर हूं अपनी गरीबी का हिसाब मत देना

मक़तब से मदीना तक है मुहब्बत ज़िस्त की कर्बला
इश्क इबादत में गम- ए- दिल की किताब मत देना

सुना है लाख हैं तारे टिमटिमाते तेरे घर की छत पर
मैं आफ़ताब वफ़ा का बेवफ़ाई का हिज़ाब मत देना

शहर है रौशनी में गुम मायूस दिल बड़ा मासूम-सा
दुआ में गाफ़िल दिल को कभी ज़हर-शराब मत देना

जिस्म फ़कत है वक़्ती सख़्त है जमाने का उसूल
रूहानी इश्क़ है अपनी इसे शक्ल-ए-शबाब मत देना

-भास्करानंद झा भास्कर
एक महीने पहले
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