भारत की बेटियां विश्व भर में अपना परचम लहराती हैं
बन के कल्पना चावला अंतरिक्ष तक अपना नाम कमाती हैं
यदि उठाती जनता की आवाज तो सुषमा स्वराज हो जाती हैं
अपने प्रखर वाक्पटूता से विपक्षियों को मूक कर जाती हैं
जब खेलती हैं खेल तो जग में अपना मान बढ़ाती हैं
अपने प्रतिभा कौशल के दम पर पदक जीत ले आती हैं
बात सौंदर्य की हो तो बन ऐश्वर्या राय दुनिया पर छा जाती हैं
ऐसे ही नहीं बेटियां देवियों का स्वेयमैव रूप कहलाती है
कहे "निशब्द" वह है अज्ञानी जो कहते बेटियां बोझ बन जाती हैं
वह मातृशक्ति ही है जो बन कर पुष्प इस वसुधा को महकाती है
- राजेन्द्र वाजपेई"निशब्द"
पड़री कलां उन्नाव मो न -8795049905
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