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रामलला दर्शन

Bhagyamani Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            राम कहत हैं, राम सुनत हैं
        
                                                    
                            
राम कृपा, आज नयन भरत हैं

देखो रामलला, ऐसे ही देखो
दशरथ लाल, तुम मुस्कत देखो
नयन हटावत, हृदय भरत है

दर्शन आतुर, शिव दौड़त हैं
दर्शन देने , राम रोवत हैं

नटखट सरल, दास के स्वामी
आगमू बनी, शिव-राम खेलत हैं

सोचत राम रस , ये नगरी पैंसे
रामकृपालु, रस राम बहत हैं

राम कृपा, आज नयन भरत हैं ।।
2 महीने पहले
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