-: कला और कविता :-
जिन भावों को मैं,
कविताओं में नहीं उतार पाया,
उन्हें उकेरा मैंने
अपनी कलाकृतियों में।
और जिन दृश्यों को मैं
कलाकृतियों में नहीं उकेर पाया,
उन्हें उतारा मैंने
अपनी कविताओं में।
इस तरह दोनों ही कलाएं
मुझे नित निखारती है।
कला और कविता मिलकर
मुझसे मेरा ही परिचय करवाती है।
-भगवान सिंह चारण