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छूटते मित्र

Bhagwan Singh Charan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शताब्दी एक्सप्रेस की तरह
        
                                                    
                            
दौड़ती हुई ज़िन्दगी में,
दोस्त पीछे छूटते
जा रहे हैं पेड़ों की तरह।

 
2 महीने पहले
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