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बरसात का मौसम

Befikr te

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये बरसात का मौसम तो गुज़र जाएगा
        
                                                    
                            
जो आँखे रोज़ बरसती है
उनकी फ़िक्र करो!

ये घटाएँ तो आती जाती रहेगी यूँ ही
जो बाहें रोज़ तरसती हैं
उनकी फ़िक्र करो!

ये रुत यूँ ही रंग बदलती रहेगी सदा
जो नज़रें कभी नहीं बदलती हैं
उनकी फ़िक्र करो!

पतझड़ के बाद फिर बाहर आ जाएगी
जो पत्तियाँ शाख़ से टूट जाती हैं
उनकी फ़िक्र करो!

- बेफ़िक्र ते बेपरवाह
2 महीने पहले
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Manju Sharma

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