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मुझे कोई झूठी दिलासा ना दिलाए तो अच्छा है

Basant panwar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिल के अरमां दिल में ही रह जाए तो अच्छा है,
        
                                                    
                            
मुझे कोई झूठी दिलासा ना दिलाए तो अच्छा है।

तन्हाईयों से कर ली है अब मैने मुकम्मल दोस्ती ,
अब मेरे करीब कोई न आए तो अच्छा है ।

टूट कर बिखर चुके है जो ख्वाब रातों में ,
उन्हें कोई आँखों में न सजाये तो अच्छा है ।

एक अकेला दिया कब तक लड़ता रहेगा तूफानों से ,
किसी हवा के झोंके से बुझ जाए तो अच्छा है।
-बसंत पंवार प्रजय 
2 महीने पहले
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