मेरे कामों का हिसाब देखते है ,
साहिल में रहकर सैलाब देखते है ।
जिनको कल हमने तैरना सिखाया था ,
वही हमे डुबोने का ख्वाब देखते है ।
-बसंत पंवार प्रजय