नहीं छुआ पर-स्त्री को मैंने,
मेरे जैसे वचन निभाना।
अपनी बहन की इज़्ज़त ख़ातिर,
ईश्वर से भी तुम लड़ जाना॥
मुझे हर साल जलाने वाले,
राम बनकर मुझे दिखाना।
नहीं बन पाए अगर राम ,
फिर रावण बनकर तुम मर जाना॥