विज्ञापन

सावन।

BAJRANGI LAL

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            झूमत गावत नाचत हैं सब,
        
                                                    
                            
सावन में हमका दुःख भारी।
दूर गये पिय हैं जब से सखि,
सेज हमार लगे चिनगारी।
सूखि गई तन की फसलें,
इत बारिश में सगरों हरियारी।
कंत बिना सब व्यर्थ भयो,
अब कौन भरै हमका अकवारी।।१।।
- बजरंगी लाल
 
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile