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सर्वशक्तिमान ईश्वर

Babu Ratanpura

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वह कण-कण में बसा हुआ है, वह अंबर का विस्तार है,
        
                                                    
                            
इस सृष्टि के कोने-कोने में, उसी का पावन प्यार है।

वही चलाता चक्र समय का, वही सूर्य का तेज अपार,
उसकी मर्जी बिन नहीं हिलता पत्ता भी , तिनका भी रुक जाता बीच मंझधार।

अंधकार को चीरकर जो, नव सवेरा ले आता है,
वही हर एक टूटे मन को, धीरज बंधाकर अपनाता है।

तूफानों की जिद के आगे, जो पर्वत बनकर टिक जाता है,
हर आंधी में भी वह मालिक, अपना रास्ता बना ही जाता है।

समुद्र की उन ऊंची लहरों में, उसी का स्वर गूंजता है,
हर एक जीव की धड़कन में, उसका प्रकाश चमकता है।

न कोई उसका आदि अंत है, न कोई उसकी सीमा है,
वह पालनहार इस जग का, वही करुणा की गरिमा है।

झुक जाते हैं शीश सभी, जब उसकी महिमा गाते हैं,
सर्वशक्तिमान के चरणों में, सब सुकून को पाते हैं।

अटल है उसकी हर इक रचना, न्याय उसका महान है,
वही है सृजनहार जगत का, वही सर्वशक्तिमान है।

 
2 घंटे पहले
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