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कर्मयोग की राह पर

Babu Ratanpura

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चौबीसों घंटे आँखों में बस देश का ही ध्यान,
        
                                                    
                            
कर्मयोग की राह पर जो डटे रहें बलवान।

दिन-भर की आपाधापी के बाद जब ढलती रात,
पलक झपकते मिल जाती है विश्राम की सौगात।

आठ सेकंड का खेल अनोखा, गहरी निद्रा आए,
मानो सारा तनाव पल में ही सिमट कर रह जाए।

केवल तीन घंटे का सोना, फिर जागना भोर,
राष्ट्र-सेवा की धुन में खिंचे चले जाते उस ओर।

न कोई शिकवा थकान का, न अलसाने की बात,
कर्म-पथ पर चलते-चलते बीत जाए यह रात।

कम सोकर भी चेतना में जो भरते नया उजाल,
संकल्पों के आगे झुकता समय का भी यह काल।

तीन घंटे की निद्रा में भी देश-हित के सपने,
जिनकी मेहनत के क़ायल हैं सब पराये-अपने।

आठ सेकंड में सो जाने का यह अद्भुत विज्ञान,
कहता है निष्काम भाव ही ऊर्जा की पहचान।
 
एक महीने पहले
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