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कण-कण में भगवान

Babu Ratanpura

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फूलों की उस कोमल लाली में, उसका ही रूप समाया है,
        
                                                    
                            
नित बहती ठंडी बयार में, उसका ही संदेश आया है।

मत ढूँढो उसको मंदिरों में, तीर्थ-स्थान महान में,
वह तो हर पल मौजूद है, इस सृष्टि की हर इक जान में।

पर्वत की ऊँची चोटियों पर, सागर की गहराई में,
सूरज की पहली किरण में, रातों की परछाई में।

पेड़-पौधे और नदियाँ सारे, उस का ही गुण गाते हैं,
भक्त अपनी मीठी वाणी से, भजते उसको और तर जाते हैं।

जो देखे ध्यान लगाकर , हर जीव में उसे पाता है,
भक्तों के इस निर्मल मन में, वह दर्शन देने आता है।

अदृश्य होकर भी वह प्रभु, सब पर नजर रखता है,
इस चराचर जगत के भीतर, वह प्राण बनकर बसता है।

 
22 घंटे पहले
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Ankit Kumar

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