विज्ञापन

वादियों एवं भूमियों में नवल गान*

Babiya khatoon

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जिंदगी के चमकते समुंदर एवं किनारे
        
                                                    
                            
किनारा समुंदर के मुलायम किनारा हो,
कोई हालातें मुश्किल का दरिया के दरख्त का
कोमल पाक सहारा कोई,
करोड़ कांच दुनिया लाख नाच मेरी दुनिया,
दिल में खोए हर मुलाकात से साथी के
एक नई जज्बात ऊर्जा सम्मिल हो कोई,
तुम मेरे सतरंगी कांच दुनिया
नजम सवाल गहरा इरादा,
गजल उत्तर सरहद बैंगलोर पार
आकाशों की बात प्रकाशित झलकती है,
टिमटिमाती अभिज्ञान शर्माती श्रम,
हिलोर करती प्रकृति जोर, दिखती कोने का कोर,
वादियों में नवल गान मान मान बनाती,
भूमियों में नवल गान बनाती, प्रेम शान

 
9 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Rajiv Tyagi

423 कविताएं

View Profile

Anil Kumar

4216 कविताएं

View Profile

Sanjay Nirala

42 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

12470 कविताएं

View Profile