जिंदगी के चमकते समुंदर एवं किनारे
किनारा समुंदर के मुलायम किनारा हो,
कोई हालातें मुश्किल का दरिया के दरख्त का
कोमल पाक सहारा कोई,
करोड़ कांच दुनिया लाख नाच मेरी दुनिया,
दिल में खोए हर मुलाकात से साथी के
एक नई जज्बात ऊर्जा सम्मिल हो कोई,
तुम मेरे सतरंगी कांच दुनिया
नजम सवाल गहरा इरादा,
गजल उत्तर सरहद बैंगलोर पार
आकाशों की बात प्रकाशित झलकती है,
टिमटिमाती अभिज्ञान शर्माती श्रम,
हिलोर करती प्रकृति जोर, दिखती कोने का कोर,
वादियों में नवल गान मान मान बनाती,
भूमियों में नवल गान बनाती, प्रेम शान
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