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सितारे आसमाँ के...

Azhar Sabri

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सितारे आसमाँ के भी फ़ज़ाओं से निकल जाएँ।
        
                                                    
                            
अगर ये दर्द मेरी बद्दुआओं से निकल जाए।

कोई रस्ता दिखा ऐ रब्ब-ए-आलम, अब अँधेरे में,
कि भटका कारवाँ काली घटाओं से निकल जाए।

तुम्हें पाकर भुलाना अब नहीं मुमकिन, मेरे दिलबर,
तुम्हारा ज़िक्र कैसे दिल की गहराइयों से निकल जाए।

हवा का रुख़ बदल दे जो, उसी का नाम आँधी है;
चराग़-ए-हक़ कहाँ डरकर हवाओं से निकल जाए।

ज़माना लाख बदले अपनी फ़ितरत और रवायत को,
मगर सच कब किसी झूठी सदाओं से निकल जाए?

सियाह रातों में भी रौशनी का दौर आएगा,
कोई जुगनू भी शायद इन फ़ज़ाओं से निकल जाए।

दुआ बस इतनी है, गिरते हुओं को थाम ले कोई;
कि इंसाँ अपने भीतर की ख़ताओं से निकल जाए।

- अज़हर साबरी
2 महीने पहले
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