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गर हो तुमसे वफ़ा तो...

Azhar Sabri

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गर हो तुमसे वफ़ा तो वफ़ा कीजिए।
        
                                                    
                            
राह-ए-उल्फ़त में ख़ुद को फ़ना कीजिए।

ग़ैर की बात पर ग़ौर मत कीजिए,
दिल की आवाज़ पर दिल दिया कीजिए।

वक़्त के हर सितम को हँसी में छुपा,
मुस्कुराकर भी अपना गिला कीजिए।

रास्ते ख़ुद ही आसान होते नहीं,
पत्थरों से भी अपना पता कीजिए।

ज़हर भी मुस्कुरा कर अगर चे वो दे,
प्यार से मुस्कुरा कर पिया कीजिए।

ज़ख़्म गहरे हों, दुनिया से कहिए नहीं,
दर्द को दिल में रखकर दुआ कीजिए।

जब अँधेरा बहुत हो निगाहों में भी,
एक चराग़-ए-वफ़ा सा जला कीजिए।

जब ज़माना कभी आज़माने लगे,
अपने ईमान का फिर दिफ़ा कीजिए।

दिल में नफ़रत अगर घर बनाने लगे,
प्यार का दीप बनकर जला कीजिए।

- अज़हर साबरी
2 घंटे पहले
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