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अँधेरी रात में जुगनू को...

Azhar Sabri

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अँधेरी रात में जुगनू को रहनुमा लिख दे।
        
                                                    
                            
तू मेरे दर्द की तक़दीर में दवा लिख दे।

भले ही रंज-ओ-मुसीबत का सिलसिला लिख दे,
मगर तू साथ में लड़ने का हौसला लिख दे।

अगर यही है मुक़द्दर में मेरी ऐ मौला,
तो हर क़दम पे मुझे सब्र का दिया लिख दे।

मिले जो ज़ख़्म ज़माने से, मुस्कुरा के सहूँ,
तू मेरी ज़ीस्त का हासिल फ़क़त रज़ा लिख दे।

दिलों में उठ गई जो नफ़रतों की दीवारें,
उन्हें गिरा के मोहब्बत का रास्ता लिख दे।

ग़मों की धूप में झुलसे हुए मुसाफ़िर हैं,
तू अपनी रहमतों की ठंडी-सी हवा लिख दे।

जो लिख रहा है तू तक़दीर मेरी ऐ मौला,
तो मेरी माँ की दुआओं को आसरा लिख दे।

- अज़हर साबरी
3 महीने पहले
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