नवगीत -करी बड़ाई है
क्वाँर मास में
बारिश की
हुई विदाई है।
मंच पर रामलीला
चल रही।
देश की महंगाई
खल रही।।
मेघों की
हरियाली ने
करी बड़ाई है।
बादलों का घिरना
बंद हुआ।
जैसे कि
चौपई छंद हुआ।।
वाह! शीत ऋतु की
अब तो
आहट आई है।
-अविनाश ब्यौहार