विज्ञापन

झपट पड़ा है बाज अचानक।

Avinash Beohar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वो मिल बैठे आज अचानक।
        
                                                    
                            
भूल गया मैं काज अचानक।।

दुःख-दर्दों का ये आलम है-
गिरती है ज्यों गाज अचानक।

मन के इन सूने महलों में-
बज उठते हैं साज अचानक।

उड़ते देखा गौरैया को-
झपट पड़ा है बाज अचानक।

गड़बड़ घोटाला जो करते-
उनका खुलता राज अचानक।
-अविनाश ब्यौहार
 
6 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all