मेरे दिल से पूछो कि तुम क्या हो
खूबसूरती के घर का तुम पता हो
दवा पीने के बाद जो आती है
तुम उस नींद से पहले का नशा हो
तुममें नहा लूँ या तुममें डूब जाऊँ
तुम समंदर हो या फिर दरिया हो
मेरी आँखें तुम्हें चखकर कहती है
तसवीर के रूप में तुम बढ़िया हो
काश तुम मेरी चाहत समझ सकती
कैसे बताऊँ कि तुम मेरी तमन्ना हो
-अवतार सिंह अक्षरजीवी