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कल वही मिलेंगे हमारा नाम बता कर।

Atul Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या कुछ नहीं किया अपनी कमी छुपा कर,
        
                                                    
                            
खुद को खो दिया सबको खुशियाँ दिला कर।
जब वक्त ने पूछा, "क्या पाया ज़िंदगी से?"
हम चुप रह गए अपनों का नाम गिना कर।
सैकड़ों नदियाँ हैं गुमनाम समंदर में जा कर,
हम रह गए तन्हा किनारों को बचा कर।
मशहूर होते रहे लोग हमारे किस्से चुरा कर,
हम गुमनाम ही रहे अपनों का नाम बना कर।

"क्या कुछ नहीं किया अपनी कमी छुपा कर,
खुद को तराश लिया वक्त की ठोकरें खा कर।
आज जो नज़रअंदाज़ करते हैं हमें,
कल वही मिलेंगे हमारा नाम बता कर।"
एक महीने पहले
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