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कौन है मूर्तिकार?

Atul Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक कहानी गूँजी थी,
        
                                                    
                            
मानव का मूर्तिकार है भगवान,
दिव्य लीला की मिट्टी से,
बनाया था इंसान,
लक्ष्य बनाया मोक्ष को,
और फूँकी सब में जान,
बाँट के अपने अंग ब्रह्मा ने,
मनु को दी पहचान।

पर जागते ही देखा उसने,
बादल काले मँडराते,
घोर वर्षा के प्रलय में,
मानव वापस मिट्टी बन जाते,
इस डर से जो उठा दर्द
चाहिए था एक मीठा मरहम,
इस कमज़ोरी को छुपाने को ही,
उठने लगे इंसानी कदम।

उसी कदम से उठी दूसरी कहानी,
मानव के बोल और मानव की वाणी,
कि उठाया इंसान ने मिट्टी का ढेर,
दिव्य मूर्ति पे छोड़ी इंसानी निशानी,
ढाला उस मूर्तिकार ने भगवान को,
सादी मिट्टी को दिव्य रूप देके,
मनुष्य ने दी मनुष्यता की कुर्बानी।

मिट्टी की मूरत में उसने,
फूँकी थी जब अपनी जान,
या टूटते हौसलों के डर ने थामने को,
शब्दों में ढाल दिया भगवान?
कौन कहानी झूठी और कौन कहानी सच्ची,
और कौन सच्चा मूर्तिकार यहाँ?
भगवान से इंसान, या भगवान इंसानी है?
खुदा ने बंदा बनाया, या बंदे की ये मेहरबानी है?
3 महीने पहले
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