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कश्ती और किनारा

Atul Kumar Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वो आइना है मेरा,मुझको जरूरत उसकी
        
                                                    
                            
भुला दूँ कैसे भला भोली सी सूरत उसकी

वो मुझसे प्यार किया मैं उससे प्यार किया
करूँ मैं दफ्न भला कैसे मोहब्बत उसकी

इसी खयाल में हर उम्र गुजार दी हमनें
जहन-ए-गिर्दाब में है इश्क़ की जीनत उसकी

ये चन्द असआर मेरे मौला बयाँ क्या क्या करें
नही मिलती कोई गम-ए-गर्दीसे-सूरत उसकी
-अतुल सिंह मृदुल
2 महीने पहले
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