आखिर किस मुँह से आजादी का जश्न मनाओगे तुम, जब आजादी रहेगी ही नहीं
किस मुँह से अपने देश को लोकतांत्रिक बताओगे तुम,जब लोकतंत्र रहा ही नहीं
आखिर किन आँखों से युवा देखेगी अफसर बनने के सपने, जब सपनों को बुन रहे थे जो धागे वो रहे ही नहीं
आखिर किस न्यायालय में न्याय की गुहार लगाओगे तुम,जब सरकार न्यायी बचा ही नहीं
आखिर कैस अपनी बेटियों को पढ़ाने भेजोगे तुम जब उनके हिफाजत के लिए कोई खड़ा ही नहीं
अंग्रेजों से आजादी की लड़ाई तो लड़ ली तुमने, पर किस मुँह से इस तानाशाही का जवाब दोगे तुम
जब लोग भी अपने और उन्हें सत्ता पर बैठाने वाले भी तुम ही
किस मुँह से परदेश छोड़ के आओगे तुम जब अपनी देश की महानता बताने के लिए कुछ बचा ही नहीं
अरे कब तक पंजे और कमल के पीछे अपना मुंह छिपाओगे भारतवासी, उससे ऊपर भी होता है एक मत वो मत है इंसानियत का
क्यों भूल जाते हो ये बात की आज जो कुर्सी पर बैठे आम आदमी का तमाशा बना रहे उन्हें वहां पहुंचाया भी है तुमने ही
कब तक यूँ चुप्पी साधे बैठोगे तुम ये कह के कि दूसरी पार्टी होती तो ये ना होता या फिर ये तो सिर्फ एक political agenda है हमारे चुने हुए लोगों के खिलाफ
हम क्यों आवाज उठाएं जब हम तो पेपर लीक के शिकार ही नहीं, हम तो रेप केस के शिकार ही नहीं या फिर हमे तो किसीने दहेज माँगा ही नहीं
क्या बीती होगी उस बच्चे पर जिसने अपने परिवार को भरोसा दिलाया होगा कि आखिरी बार मुझ पर भरोसा कर लो इस बार पेपर निकल जाएगा, क्या बीती होगी उस बाप पर जिसने अपनी बेटी के लिए महलों के सपने देख कर उसे ब्याहा होगा या फिर क्या बीती होगी उस मां पर जिसने गर्व से अपनी डॉक्टर बिटिया को नाइट ड्यूटी के लिया विदा किया होगा इस बात से अंजान की वो शायद था आखिरी बार
पर... ये तो हमने कभी सोचा ही नहीं
क्योंकि हम पर तो कभी बीती ही नहीं
हां जानती हूं कुछ लोग कहेंगे कि अब इसमें सरकार क्या कर सकती है ये तो किस्मत किस्मत की बात है
तो सुनो सरकार ये कर सकती है कि, उस इंसान को सत्ते से हटाया जाये जिसे उस औधे और आम आदमी की ताकत का इल्म ही नहीं
रेपिस्टों को अपनी पार्टी में मालाओं से स्वागत करने के बजाए उसे ऐसी सजा दी जाए कि किसी और की ऐसी हिम्मत भी हो नहीं
जाग जाएँ अगर अब भी देशवासी यहाँ के तो शायद भारत जुर्मों से आजाद हो जाएगा क्योंकि कुर्सी पर इंसान नहीं भ्रष्टाचार खुद जो आ कर बैठा है
बचा लो अटल जी के स्वप्नों की भारत को, बचा लो संविधान में दिये गए तुम्हारे अधिकारों को
वरना देर जो हो गई तो बिक जाएगा ये भारत और विचार करने के लिए भी कुछ रहेगा नहीं
भारत मां की कोख से जन्मे हैं हम भारतीय हैं हम
अब भी जो आवाज़ ना उठाई हमने
तो किस मुँह से आखिर आजादी का जश्न मनाओगे तुम जब देश आजाद रहेगा ही नहीं
जय हिंद