विज्ञापन

शरद पूर्णिमा

Ashwin Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज रजनी नव कर्पट ओढ़े, अंबर पर आई सजके।
        
                                                    
                            
आज गगन से चटक चंद्रिका, बरसाए अमृत रजके।।
नभ की मृदुल-मृदुल बदलियाँ, अलकें हों निशि की जैसे।
तारागण क्रम में रच चमके, भूषण पर मुक्तिज जैसे।।
भोर भोर ही नीर बिंदुका हरित तृणों पर बिछ जाएँगी।
धरणी की धानी साड़ी पर स्वातीसुत सम सज जाएँगी।।
एक वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all