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हे मां तुम न अश्रु बहाना

Ashish Trivedi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हे माँ तुम ना अश्रु बहाना ,
        
                                                    
                            
खूब सजाना पाती दीपों की,
अपने रोते मन को समझाना,
दीप जलें तो लौ में नित क्षण,
मेरे हँसते सपनों को ही पाना,
पर हे माँ तुम ना अश्रु बहाना।

बिखरी है हर पग पर हर पथ ,
राख उड़ी तो अंतिम मेरी,
विजय पताका फहराएगी,
मेरी अंतिम श्वास की भेरी,

दर्द छिटक कर जो आ जाए,
उसको पल में दूर हटाना,
आंखे कितना भी कोसें तुमको,
पर हे माँ तुम ना अश्रु बहाना।

- आशीष त्रिवेदी,
कानपुर/गुरुग्राम


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6 वर्ष पहले
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