देश के लिए हम प्रेरित करते हैं,
देश के लिए हम जीवित रहते है,
फक्र है हमारी माटी पर,
जिसने हमें भी गोंद दिया,
देश के वीर भी हम बनेंगे,
सर सबसे ऊंचा हम अपना भी करेंगे,
हम भी बतायेगे,
ख़ून है या पानी बहता है रग में हमारे,
रग रग में है मेरा वतन है बहता,
बच्चे-बच्चे को यह संदेश हम सुनायेगे,
जब से हमे तिरंगा से प्यार हुआ है,
इकरार हम करते हैं,नमन भी करते हैं हम,
तिरंगा के लिए सदा, हम ऊंचा सर भी करते,
सीना तान के खड़े हो कर,
तीरंगे का अभिमान हम बढ़ाते हैं,
देश के वीर हम भी बनेंगे
हम भी गोली सीने में खायेंगे,
एक वक्त में एक साथ, खड़े हम मिलेंगे,
ऐं मेरे वीर सपूतों,हम भी देश सेवक बनेंगे,
हम भी, एक कसम है खाते
वीर है,क्या हम कहलाते,
क्या हम सिर्फ देश में रहते
सच्चे सेवक क्या ऐसे कहलाते हैं
सूरज सा जलना क्या हमने भी शिखा,
देश के वीर हम भी बनेंगे
जो हमसे टक्कर लेगा
आग लगा कर,राख करेंगे
ऐसे ही हम एक साथ,हम खड़े मिलेंगे।।
वतन के लिए जज़्बा पैदा कर लेना
दुश्मनों से लोहा हम भी लेंगे,
देश के वीर हम भी बनेंगे,
ऐसे ही होगा नव निर्माण,
ऐसे ही हम ना पीछे हटेंगे!!
देश के वीर सैनिकों हम भी बनेंगे
सरहद पर तैनात मिलेंगे,चाहे गोली सीने के हो पार
ऐसे ही नहीं, हम वीर कहलाते,
देशभक्त हैं हम कहलाते हैं,
देश के वीर हम भी बनेंगे।
वीर सिपाही सा हम टिकें रहेंगे,
दाना और पानी सब छोड़ दिया अब,
वतन का सिर हिमालय सा ऊंचा करेंगे
ऐसे ना अब हम पिछे हटेंगे
देश के वीर सैनिक अब हम भी बनेंगे।
-आशीष द्विवेदी समदरिया