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सभ्य होने के लिए

अशोक दर्द

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सभ्य होने के लिए....
        
                                                    
                            
बीहड़ आरण्य - जीवन छोड़कर
बड़े-बड़े शहर बसा लेना
पत्थरों को रगड़ना छोड़कर
माचिस का आविष्कार कर लेना

नग्न विचरना छोड़कर
रंग-बिरंगे गर्म सर्द वस्त्र धारण कर लेना
पाषाण और धनुष बाण छोड़कर
बमों का निर्माण कर लेना

हाव-भाव की भाषा से निकलकर
नए शब्द ईजाद कर लेना
आसमान को छू लेना या फिर
सागर में अठखेलियां कर लेना

कंदमूल की दुनिया से
नए-नए स्वादु व्यंजनों की दुनिया तक
का सफर पर्याप्त नहीं है
आदमी को सभ्य होने के लिए

सभ्य होने के लिए
आदमी को आदमी की भाषा चाहिए
उसके अंदर आदमी का दिल होना चाहिए
उसके हाथों में आदमी का काम होना चाहिए

प्रकृति के आंगन में
सुसंस्कृत अनुशासित विचरण चाहिए
तभी आदमी सभ्य हो पाएगा
वरना पाषाण युग से भी गिरता जाएगा...।।
-अशोक दर्द
3 महीने पहले
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