विज्ञापन

कई रातों को मिला कर

Asha Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कई रातों को मिला कर मेरी
        
                                                    
                            
एक रात होती है।
यादों में गुज़रे लम्हों की जब
बरसात होती है।।

बरसों गुज़ारे है हमने तन्हाइयों
के संग।
जाने कहां दिल से दिल की
मुलाक़ात होती है।।

मेरे दिल में छुपी बैठी है ख़ामोश
सी कसक।
गाहे-बगाहे उससे मेरी मुलाक़ात
होती है।।

एक रोज़ मिल जाएंगे मेरी वफ़ा
का सिला।
इसी इंतजार में ज़िंदगी अवसान
होती है।।

परछाइयों के पीछे पीछे
भागते हुए।
एक रोज़ अपने आप से
मुलाक़ात होती है।।
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all