किसी को तिनका भी सहारा लगता है।
किसी को छप्पर फाड़ कर मिले
तब भी कम लगता है।
जनाब किस भ्रम में जी रहे हैं।
सब इसी दुनिया में रह जाएगा।
फिर इतना हापा क्यों।