मुझे वो प्यार से जब मुस्कुरा कर देखते हैं,
जुनून-ए-इश्क़ मेरा आज़मा कर देखते हैं।
वो अनदेखा मुझे करते मगर नज़रों में हूँ मैं,
बड़े चालाक हैं नज़रें बचा कर देखते हैं।
अचानक ही अगर हो सामना मुझ से कहीं तो,
झुका कर सर मुझे पलकें उठा कर देखते हैं।
सभी कहते नशीली हैं बहुत आँखें तुम्हारी,
चलो तुमसे अभी नज़रें मिला कर देखते हैं।
मुहब्बत में तड़पता देखना है शौक़ उनका,
वो शायद इस लिए मुझको सता कर देखते हैं।
वो समझेंगे मेरे दिल की कभी तो बात या रब,
उन्हें अपनी सभी ग़ज़लें सुना कर देखते हैं।
- अरुण शर्मा