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ढल गई शाम, मगर एक नया शमा रोशन हुआ

Arpit Jain

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            झुकी-झुकी सी पलकों से वो हमें देख रही थी,
        
                                                    
                            
बातों ही बातों में वो हमारी हो रही थी।

धीमी सी मुस्कान जो आई चेहरे पर उनके,
हमारी नज़र भी बस... उन पर ठहर रही थी।

कदम से कदम मिला कर... जो चल रहे उनके साथ,
वो हाथ थामे हमारा, बहुत कुछ कह रही थी।

चुप सी शाम थी, बातें भी कम हो रही थी,
आँखों ही आँखों में मगर... बातें बहुत हो रही थी।

ढल गई शाम, मगर एक नया शमा रोशन हुआ,
उस एक शाम में... दो ज़िंदगियों का मिलन हुआ।
-अर्पित
14 घंटे पहले
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