जंजीरो से मुक्त है भारत,
आसमां में उन्मुक्त है भारत।
नित नई ऊंचाईयों को छू रही,
पूरी तरह संयुक्त है भारत।
हम अब भी वो भारत हैं,
जो भी मुझसे प्यार करे,
हम उससे अधिक निभाते हैं।
पर,
यदि दुश्मन कोई हुंकार भरे,
फिर लहू की धार बहाते हैं।
हम अब भी वो भारत हैं
जो बलिदानों से ना अघाते हैं।
है वीर सुभाष की अभिमानी धरती,
भगत-आजाद की बलिदानी धरती,
हम आज भी गांधी की अहिंसा गाते हैं।
तुम आओ,
हम तुमको गले लगाते हैं,
मेरा भारत बंदन की धरती है
पर अगर उठी नजरें तेरी
तो याद रहे भारत अभिनंदन की धरती है।
फिर घर घुस मिग का तूफान उड़ाते हैं।
हम विकसित भारत,
अब दुनियाँ मेरी शरण में आते हैं।
तुम कोई भी तकनीक बनाओ,
पर हम ज्ञान की दुनियाँ बनाते हैं।
तेरी दो इंच की दुनियाँ को,
आज भी हम ही चलाते हैं।
हम आज भी वो भारत हैं,
जो सबको दिशा दिखाते हैं।
जंजीरों से मुक्त है भारत,
आसमां में उन्मुक्त है भारत।
नित नई ऊंचाईयों को छू रही,
पूरी तरह संयुक्त है भारत।