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सजा कर रखते हैं

Arjun Prabhat

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सपनों की सौगात सजा कर रखते हैं।
        
                                                    
                            
हम दिल में जज्बात सजा कर सकते हैं।।
पतझड़ का आलम है जीवन बंजर है।
पर दिल में बरसात सजा कर रखते हैं।।
पग पग पर कांटे बिखरे हैं राहों में ।
ख्वाबों में जलजात सजा कर रखते हैं।।
कदम कदम पर लोगों ने तोड़े सपने ।
पर सपने दिन रात सजा कर रखते हैं।।
अर्जुन गहन निराशा में आशा पालो।
दीपों की बारात सजा कर रखते हैं ।।
3 महीने पहले
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