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कुछ न कुछ मजबूरी उधर भी

ARAVINDA MOHUN

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ न कुछ मजबूरी उधर भी जरूर होगी
        
                                                    
                            
वरना ये दूरी इतनी देर तक न होती।।
कुछ सोच कर बैठा रहा हाथों धरे हाथ
वरना हाथों के हाथ, कुछ करिश्मा जरुर होती।।
जिंदगी तमाशा बन न जाये, सोच कर
चुप रहा कोई, वरना कोई बात जरूर होती।।
खामोशी से जब छोड़ जाये कोई साथ तो
जज़्बातों ने ही बिगाड़ी होगी बनती बनती बात ।।
2 महीने पहले
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