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रूक जा ज़रा

अर्द्धचंद्रधारी त्रिपाठी

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बड़ा लोभी है तू बड़ा चालाक है,
        
                                                    
                            
उम्र बढ़ती रही लोभ बढ़ता रहा,
कसमें खाता रहा मैं ईमानदार हूं,
मौके हराम की कमाई के ना छोड़े कभी,
झूठ छोड़ा नहीं क्रोध छोड़ा नहीं,
वक्त जब भी मिला चुगलियों में रहा,
लोभ छोड़ा नहीं मोह छोड़ा नहीं,
कोई मिल जो गया इल्तिज़ा की बहुत,
नफरतें सबसे की बख्शा किसी को नहीं,
मैं तो कहता हूं अब से संभल जा ज़रा,
सांस ले ले घड़ी भर तो रूक जा ज़रा,
अब हकीकत का कर सामना तू जरा,
मुंह दिखायेगा कैसे तू उसको बता,
जानता है तुझे सारी दुनियां को वो,
'राम' भज ले वही तेरे काम आएगा।।
-अर्द्धचंद्रधारी त्रिपाठी
2 घंटे पहले
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