बड़ा लोभी है तू बड़ा चालाक है,
उम्र बढ़ती रही लोभ बढ़ता रहा,
कसमें खाता रहा मैं ईमानदार हूं,
मौके हराम की कमाई के ना छोड़े कभी,
झूठ छोड़ा नहीं क्रोध छोड़ा नहीं,
वक्त जब भी मिला चुगलियों में रहा,
लोभ छोड़ा नहीं मोह छोड़ा नहीं,
कोई मिल जो गया इल्तिज़ा की बहुत,
नफरतें सबसे की बख्शा किसी को नहीं,
मैं तो कहता हूं अब से संभल जा ज़रा,
सांस ले ले घड़ी भर तो रूक जा ज़रा,
अब हकीकत का कर सामना तू जरा,
मुंह दिखायेगा कैसे तू उसको बता,
जानता है तुझे सारी दुनियां को वो,
'राम' भज ले वही तेरे काम आएगा।।
-अर्द्धचंद्रधारी त्रिपाठी
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