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अरमान जलते हैं

अर्द्धचंद्रधारी त्रिपाठी

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वही रोएगा जिसको दर्द का एहसास होगा
        
                                                    
                            
कहां रोते हैं पत्थर दिल नहीं सीने में जिनके
बड़ी खामोशी से उसने छुड़ा लिया दामन
कभी खाई थी कसमें जिसने साथ रहने की
यादों के समंदर में डूब कर हमने देखा है
वहां बस लहरें उठती हैं समंदर नहीं होता
हर वक्त की तकरार से अच्छा यही होगा
रहें बस दूरियां कायम दिल का दर्द अच्छा
वो कहते थे आपके साथ हैं कुछ नहीं होगा यही एहसास काफी है ज़हन में नफ़रत का
वो दिन भी खास थे बड़े सुहाने से सपने थे
रूह में आग बनकर वही अरमान जलते हैं
3 महीने पहले
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Manju Sharma

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