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मुरझाने की नियत नहीं रखते।।

अर्द्धचंद्रधारी त्रिपाठी

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या ये सच है इसी दुनियां मे
        
                                                    
                            
घर है आप का भी,
हमें मालूम है आप,
किसी से वास्ता नहीं रखते।
हर जर्रा ख़ाक हो जाता है,
आखिरात में जनाब,
फूल खिलते हैं बस,
मुरझाने की नियत नहीं रखते।।
राम आएंगे आज,
सारी दुनियां कह रही है बेशक,
वो गए ही कब,
बस आप उन्हें दिल में नहीं रखते।।
फर्क रत्ती सा है बस,
आप के जहन-वो-नजरिए में,
हम ए कहते हैं बस वही हैं,
आप कहते हैं नहीं हैं।।
एक महीने पहले
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