आता नहीं रुठे को मनाना...
आता नहीं दुखों को बांटना...
आता नहीं साथ निभाना...
आता नहीं सहारा बनना...
आता नहीं परवाह करना...
आता नहीं हाथ थामना...
आता नहीं बातें मानना...
आता नहीं खुद को झुकाना...
तो फिर तुम्हें क्या आता है ???
आता है खुद को उठाना...
आता है बस भाग जाना...
आता है आंखें चुराना...
आता है चीखना चिल्लाना...
आता है बस गुस्सा दिखाना...
आता है बदसूरती दिखाना...
आता है बस दुखी करना...
आता है रोता छोड़ जाना...
आता है और भी बहुत कुछ...
पर जरुरी नहीं उनको बताना...
बताना मतलब मिट्ठू बन जाना...