गिरी से ऊंचा हौसला ,
गहराईयां समंदर सी ...
मासूम सी तस्वीर कभी,
कभी प्रेम से आलोरती ..
समुद्र की चंचल लहरों सी ,
तपन में शीतल चंद्र सी ..
हर रूप तेरा अद्भुत है ,
हर तिमिर में आलोक सी ..
भावों की इस असीमता को ,
कौन जान सकता है यहां...
हर रिश्ते के किरदार को ,
कौन यूं निभा सकता भला ..
लक्ष्मीबाई सा हौसला तो ,
पन्ना सी ममताभरी ..
पद्मावती सी त्याग निडरता,
मीरा प्रेम से हुंकारती..
प्रेम है तू प्यार है तू ,
दुनिया ने समझा कहा ..
इस सृष्टि की धुरी बनने,
ईश्वर ने तुझको गढ़ा...