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मेरे बिना वो कहीं जाती नहीं है

Anshumaan Vishnu

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इन पहाड़ों पर अब धूप है छाँव तक आती नहीं है,
        
                                                    
                            
अब हवाओं से क्या गिला तेरी खुशबू लेकर आती नहीं है..

इतना अकेला रहता हूँ कमरे में रौशनी आती नहीं है,
कितना भी जोर से पुकारू तुझ तक आवाज जाती नहीं हैं..

वो कितना भी नाराज हो उसकी कसमें खाते नहीं हैं,
ज़िन्दगी शायद ख़तम हो गई पर मौत भी आती नहीं है..

साथ रहती है जब भी नजरे चुराती नहीं है,
गुस्सा मैं कितना भी रहूं दूर मुझसे जाती नहीं है..

अक्सर देर रातों को उसे नींद नहीं आती,
कैसे जीतेगी अकेले, मेरे बिना वो कहीं जाती नहीं है..

–Phantom


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6 वर्ष पहले
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