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भटक रहा

Anoop S

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं दर बदर भटक रहा...
        
                                                    
                            
....घर की तलाश में।
वो शामो सहर भटक रहा...
....शहर की तलाश में।।
मैं गली गली भटक रहा...
....नजर की तलाश में।
वो दरिया पार कर गया...
....लहर की तलाश में।।

मैं यहां भटक रहा...
.... दहर की तलाश में।
वो वहां भटक रहा...
....सफर की तलाश में।।
मैं समुद्र मंथन कर रहा...
....अमृत की आस में।
वो किनारों पर भटक रहा...
....जहर की तलाश में।।


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एक महीने पहले
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