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हां एक ख़्वाब से ज़्यादा भी कुछ नहीं है ये

Anmol Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हां एक ख़्वाब से ज़्यादा भी कुछ नहीं है ये
        
                                                    
                            
ये ज़िंदगी है मगर ज़िंदगी नहीं है ये

ख़ुमार तेरी मोहब्बत का है अभी सर पर
ऐ जान मेरी, मगर बेख़ुदी नहीं है ये

अभी मैं सोच में डूबा हूं इसलिए चुप हूं
ऐ मेरी जान कोई बेरुख़ी नहीं है ये

पुराना रब्त है ग़म से मेरा मेरे यारों
हां मेरे वास्ते कोई अजनबी नहीं है ये

है एक डर जो ये सजदे में सर झुकाया है
तुम्हारे नाम की कोई बंदगी नहीं है ये।
-अनमोल
2 घंटे पहले
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Sanjai kumar

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