हां एक ख़्वाब से ज़्यादा भी कुछ नहीं है ये
ये ज़िंदगी है मगर ज़िंदगी नहीं है ये
ख़ुमार तेरी मोहब्बत का है अभी सर पर
ऐ जान मेरी, मगर बेख़ुदी नहीं है ये
अभी मैं सोच में डूबा हूं इसलिए चुप हूं
ऐ मेरी जान कोई बेरुख़ी नहीं है ये
पुराना रब्त है ग़म से मेरा मेरे यारों
हां मेरे वास्ते कोई अजनबी नहीं है ये
है एक डर जो ये सजदे में सर झुकाया है
तुम्हारे नाम की कोई बंदगी नहीं है ये।
-अनमोल