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कभी तो प्यार का, इकरार का, चाहत का तुम सोचो

Anmol Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी तो प्यार का, इकरार का, चाहत का तुम सोचो
        
                                                    
                            
कभी तो यार अपनी पहली वो उल्फ़त का तुम सोचो

चलो ये ठीक है हम दोनों दुनिया अब बसाएंगे
कभी तो उसमें आयेगी जो वो आफ़त का तुम सोचो

अभी तो प्यार है, इकरार है, उल्फ़त है दोनों में
कभी जो दिल में पैदा हो 'गर उस नफ़रत का तुम सोचो

ये रुपये, पैसे, सोने,चांदी, बाज़ार के हैं सब
जो दिल में है छुपी उस कीमती दौलत का तुम सोचो

मैं शायर हूं, मोहब्बत बांटना तो काम है मेरा
दिलों में पहले जो बैठी है उस नफ़रत का तुम सोचो ।
-अनमोल
एक दिन पहले
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