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तुम्हारी याद के बादल ज़हन में छा गए फिर से

Anmol Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम्हारी याद के बादल ज़हन में छा गए फिर से
        
                                                    
                            
लो अब मौसम उदासी के मेरे घर आ गए फिर से

बहुत मुश्किल से निकला था मैं अपने इस ग़म-ए-दिल से
और एक तुम हो तराने इश्क के क्यों गा गए फिर से

यहां मैं तो तुम्हारी खैरियत की चाह रखता हूं
और एक तुम हो नया एक ज़ुल्म मुझपे ढ़ा गए फिर से

कि कब हम तुमसे बरहम थे ऐ हमदम ऐ मेरी जाना
क्यों फिर तुम आज झूठी कसमें मेरी खा गए फिर से

कि अपना नाम तेरे लब से सुनकर यूं लगा हमको
हम अपने खोए सारे चैन को अब पा गए फिर से।
-अनमोल
2 महीने पहले
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