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छुट्टी के दिन (नज़्म)

Anmol Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सुना है छुट्टी के दिन अब आने वाले हैं
        
                                                    
                            
नई उमंगें साथ में वो लाने वाले हैं

कल से देख रहा हूं नुक्कड़ पर
लगातार कुछ बसें आती हैं
साथ में अपने कितने चेहरे लाती हैं
उनमें कितने भाई, बहन, शौहर आते हैं
रिश्तों के कैसे-कैसे गौहर आते हैं
(गौहर: मोती)

ये सूना सा गांव कल से चहक रहा है
रिश्तों की खुशबू में कल से महक रहा है
कई गुज़िश्ता माह अकेलेपन में बीते
रिश्तों के खाली से सूनेपन में बीते
(गुज़िश्ता: पिछला)

अब देखो ये चेहरे कैसे चमक रहे हैं
कल से देखो कैसे ये सब चहक रहे हैं
मेरे दिल में भी एक आस ने घर किया है
इन चेहरों को देख कर ये दिल बोल रहा है
माना कि मशगूल हो तुम अपने धंधे में
गर्दन अपनी फँसा रखे हो इस फंदे में
फिर भी ये दिल कल से यही अब सोच रहा है
शायद इस छुट्टी में तुम भी घर आ जाओ।
-अनमोल
6 घंटे पहले
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