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मंसूबे मुझमे मेहफ़ूज़ रहे

Ankur Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मंसूबे मुझमे मेहफ़ूज़ रहे
        
                                                    
                            
शिद्दत हो इतनी मेरे इरादों में

ख्वाबो से हो या वादो से
यकीं रहे मुझमें मेरा

देनी पड़े शहादत गुलिस्तनो की
बंजारा मैं फिरता रहूं

बढ़ता रहू होके सवार जुनूनों पे
मंज़िल बन जाए रास्ते
सोच हो ऐसे आयामों की

दीवानगी चढ़े सिरमौर ऐसी
रहे ना ये मौताज़ खिताबो की
3 वर्ष पहले
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Milan Thakur

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