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बिना धक्के खाए बनती नहीं पहचान है

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बिना धक्के खाए बनती नहीं पहचान है
        
                                                    
                            
बिना तपे तपाए मिलता नहीं ज्ञान है
बिना श्रम संघर्ष के बनता नहीं कोई महान है
बिना बलिदान के
बिना श्रम दान के
बनता नहीं विकसित हिंदुस्तान है
बिना वादों को धरातल पर उतारे
रचनात्मक कार्यों के सहारे
बढ़ता नहीं हमारा हिंदुस्तान है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक महीने पहले
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